जहां कभी टैंकरों का इंतजार था, वहां अब हर घर नल से जल
जल जीवन मिशन ने बदली प्रतापगढ़ के कोटड़ी गांव की तस्वीर, 570 परिवारों को नियमित पेयजल
प्रतापगढ़ जिले के अरनोद क्षेत्र स्थित कोटड़ी गांव में जल जीवन मिशन के तहत तैयार की गई पाइप जल योजना ने ग्रामीणों की पेयजल व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। कभी गर्मियों में पानी के लिए टैंकरों पर निर्भर रहने वाले गांव में अब पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर नियमित पेयजल पहुंच रहा है। योजना से कोटड़ी और दूधिया क्षेत्र के 570 परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
एक समय गर्मियों की शुरुआत के साथ ही गांव में पेयजल संकट गहरा जाता था। भूजल स्तर नीचे जाने के कारण हैंडपंपों से पानी मिलना मुश्किल हो जाता था और ग्रामीणों को टैंकरों से जलापूर्ति का इंतजार करना पड़ता था। सार्वजनिक नल और हैंडपंप ही ग्रामीणों की पेयजल जरूरत का प्रमुख साधन थे।
पहले 24 हैंडपंप, फिर भी बनी रहती थी पानी की चिंता
जल जीवन मिशन से पहले गांव में कुल 24 हैंडपंप स्थापित थे, लेकिन इनमें से केवल 7 ही चालू स्थिति में थे। कुछ हैंडपंप मौसमी थे, कुछ सूख चुके थे, जबकि कुछ तकनीकी कारणों से उपयोग में नहीं आ रहे थे। गर्मियों में जल स्तर गिरने के कारण ग्रामीणों के सामने पेयजल की समस्या और गंभीर हो जाती थी। गांव के विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम पंचायत कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में भी उस समय नल कनेक्शन उपलब्ध नहीं थे।
पाइपलाइन से घर-घर पहुंचा पेयजल
जल जीवन मिशन के अंतर्गत कोटड़ी गांव में 5 नलकूप, 350 किलोलीटर क्षमता का उच्च जलाशय और 100 किलोलीटर क्षमता का स्वच्छ जलाशय तैयार किया गया। पेयजल वितरण के लिए गांव में 9,406 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई और 570 जल कनेक्शन दिए गए। योजना के बाद गांव की पेयजल व्यवस्था में महत्वपूर्ण सुधार आया। गर्मियों के दौरान पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीणों को टैंकरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा।
स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक भी पहुंचा नल का पानी
जल जीवन मिशन का लाभ केवल ग्रामीण परिवारों तक ही सीमित नहीं रहा। वर्तमान में गांव के 6 विद्यालयों और 3 आंगनबाड़ी केंद्रों में नल कनेक्शन के माध्यम से जलापूर्ति हो रही है। इसके अलावा पंचायत कार्यालय, राजीव गांधी सेवा केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र को भी नल जल व्यवस्था से जोड़ा गया है।
पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होने से गांव में स्वच्छता व्यवस्था में भी सुधार आया है।
ग्रामीणों को बनाया गया जल व्यवस्था का भागीदार
कोटड़ी में जल जीवन मिशन की सफलता केवल पाइपलाइन और जल संरचनाओं तक सीमित नहीं है। योजना के संचालन और रखरखाव में ग्रामीणों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। इसके लिए ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन किया गया। समिति के सदस्यों को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता की जांच का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों को इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और फिटिंग जैसे ट्रेड में कौशल प्रशिक्षण दिया गया, ताकि गांव में ही जल योजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध हो सके।
साझा जिम्मेदारी से मजबूत हुई व्यवस्था
जल योजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए प्रत्येक जल कनेक्शन पर 100 रुपये मासिक शुल्क निर्धारित किया गया है। अगस्त 2026 तक ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की ओर से 22.20 लाख रुपये की राशि एकत्रित की गई, जबकि संचालन एवं रखरखाव पर 23.43 लाख रुपये खर्च किए गए।
नव निर्मित कॉलोनी को भी जल व्यवस्था से जोड़ने के लिए 2,000 मीटर अतिरिक्त पाइपलाइन बिछाई गई है। कोटड़ी गांव की कहानी बताती है कि किस तरह नियमित पेयजल उपलब्धता से ग्रामीण जीवन में व्यापक बदलाव आ सकता है। जल जीवन मिशन ने यहां केवल पेयजल का बुनियादी ढांचा तैयार नहीं किया, बल्कि ग्रामीण समुदाय को जल व्यवस्था के संचालन और रखरखाव में भी सहभागी बनाया है।
अब कोटड़ी में पानी की तलाश की जगह नियमित जल उपलब्धता ने ले ली है। घरों तक नल से पानी पहुंचने के साथ ग्रामीणों की जिम्मेदारी भी बढ़ी है और गांव अपनी जल व्यवस्था को बनाए रखने में सक्रिय भागीदार बन रहा है।
