राजस्थान में मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती, HPV टीकाकरण पर विशेष जोर

जयपुर में NHM और यूनिसेफ की दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और नियमित टीकाकरण की गुणवत्ता सुधारने पर हुआ मंथन

जयपुर । राजस्थान में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और एचपीवी (HPV) टीकाकरण कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से जयपुर में दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और यूनिसेफ के संयुक्त समन्वय से आयोजित इस कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और यूनिसेफ की टीम ने विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक कदमों पर चर्चा की गई।

कार्यशाला में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने, गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने और टीकाकरण कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। अधिकारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान पर जोर

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना स्वास्थ्य विभाग की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए गर्भवती महिलाओं को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान करने, प्रसव पूर्व सभी आवश्यक जांच कराने और नियमित फॉलोअप पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। समय पर जांच और उचित चिकित्सकीय देखभाल से गर्भावस्था के दौरान संभावित जटिलताओं की पहचान करने तथा मां और शिशु के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल करने में मदद मिल सकती है।

कार्यशाला में इस बात पर भी चर्चा हुई कि स्वास्थ्यकर्मियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर गर्भवती महिलाओं को आवश्यक सेवाएं निर्धारित समय पर उपलब्ध कराई जाएं। इसके लिए स्वास्थ्य कार्यक्रमों की नियमित निगरानी और सेवा वितरण की गुणवत्ता में सुधार को महत्वपूर्ण माना गया।

HPV टीकाकरण कार्यक्रम को प्रभावी बनाने की तैयारी

कार्यशाला का एक प्रमुख विषय एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन रहा। अधिकारियों ने इस कार्यक्रम के लिए बेहतर कार्ययोजना तैयार करने, स्वास्थ्यकर्मियों के बीच समन्वय बढ़ाने और लक्षित लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया। इसके साथ ही आमजन में टीकाकरण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। एचपीवी यानी ह्यूमन पैपिलोमावायरस एक ऐसा वायरस है, जिसके कुछ प्रकार सर्वाइकल कैंसर सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। एचपीवी टीकाकरण इस वायरस से होने वाले संक्रमणों और उनसे जुड़ी बीमारियों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यशाला में कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करने तथा लाभार्थियों तक सही जानकारी पहुंचाने पर भी चर्चा की गई।

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की भी हुई समीक्षा

दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान नियमित टीकाकरण कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसमें मीजल्स-रूबेला (MR) टीके की पहली और दूसरी खुराक सहित अन्य टीकाकरण सेवाओं पर चर्चा हुई।

अधिकारियों ने टीकाकरण सत्रों का बेहतर आयोजन करने, निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने और पात्र बच्चों तक टीकाकरण सेवाएं पहुंचाने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार किया। टीकाकरण कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा और उनकी निगरानी को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। कार्यशाला में इस बात पर ध्यान दिया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। इसके लिए जिला स्तर पर कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन करने और सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी रणनीति अपनाने पर चर्चा हुई।

राज्य और जिला स्तर पर बेहतर समन्वय की जरूरत

अतिरिक्त मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, डॉ. टी. शुभमंगला ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। इसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और उनकी गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

उन्होंने निर्धारित स्वास्थ्य लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने और उसके अनुरूप काम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए सभी संबंधित अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी और आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। कार्यशाला में स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन में सुधार की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना, टीकाकरण कार्यक्रमों को मजबूत करना और आमजन तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना रहा।

स्वास्थ्य विभाग और यूनिसेफ के अधिकारी रहे मौजूद

इस कार्यशाला में निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, परियोजना निदेशक टीकाकरण डॉ. रघुराज सिंह तथा यूनिसेफ नई दिल्ली की टीम सहित स्वास्थ्य विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यशाला में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, एचपीवी टीकाकरण और नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार और निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

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