राज्यपाल श्री बागडे ने ‘ऑक्टेव 2026’ का शुभारंभ किया, कलाकारों की प्रस्तुतियों ने किया भाव-विभोर
भारत में विविधता में एकता नहीं, एकता में विविधता है : केंद्रीय संस्कृति मंत्री
पूर्वोत्तर भारत के अष्टलक्ष्मी रूप में अनूठे सांस्कृतिक प्रदेश : राज्यपाल
जयपुर, 1 अक्टूबर। राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के अनूठे सांस्कृतिक प्रदेश हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें ‘अष्टलक्ष्मी’ इसलिए कहा गया है कि यह क्षेत्र विविधता, अपनी समृद्ध प्रकृति और सांस्कृतिक धरोहर के कारण धन-धान्य से परिपूर्ण है। उन्होंने ‘ऑक्टेव’ शब्द की चर्चा करते हुए कहा कि यह लैटिन शब्द है। संगीत में ‘अष्टक’ स्वर रूप में यह संगीत के स्वरों के बीच का अंतराल होता है। उन्होंने कहा कि ‘ऑक्टेव’ इस रूप में हमारी सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने वाला उत्सव है।
राज्यपाल श्री बागडे गुरुवार को पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित ‘ऑक्टेव 2026’ का शुभारंभ करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्य—असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम—हमारे देश की सांस्कृतिक निधि हैं। इन प्रदेशों के कलाकार वहां की संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन करने वाले हैं। उन्होंने राजस्थान में पूर्वोत्तर के कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ इन राज्यों के उत्पाद भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने प्रदर्शनी में प्रदर्शित उत्पादों को आम जन से अधिकाधिक क्रय करने का भी आह्वान किया।
भारत की विविधता में एकता का संगम है ‘ऑक्टेव’
केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों के कलाकारों का जयपुर में प्रदर्शन भारत की विविधता में एकता का संगम है। उन्होंने कहा कि भारत में विविधता में एकता नहीं, बल्कि एकता में विविधता है। उन्होंने कहा कि इसे समझने वाला व्यक्ति यह जान सकता है कि कैसे कालड़ी से केदारनाथ पहुंचकर, चार धामों की स्थापना कर आदि शंकराचार्य हजारों वर्षों तक अखंड भारत की सनातन संस्कृति को जीवंत रखते रहे। उन्होंने कहा कि कलाकारों में कला के माध्यम से एकता का प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने संस्कृति से विमुख होते युवाओं को इन आयोजनों के माध्यम से अधिक से अधिक जोड़ने पर भी जोर दिया।
कलाकारों ने किया भाव-विभोर
‘ऑक्टेव 2026’ में पूर्वोत्तर भारत के आठ राज्यों के 200 से अधिक कलाकारों ने वहां की विविध नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पेश कीं। पूर्वोत्तर भारत की संस्कृति से जुड़े 16 लोक नृत्य कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहे। कलाकारों ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर की प्रकृति, वहां की संस्कृति में समाई सुगंध और परंपराओं को अपनी संगीत एवं नृत्य प्रस्तुतियों में जीवंत किया। कलाकारों की प्रस्तुतियां देखकर उपस्थितजन भाव-विभोर हो उठे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्यजन मौजूद रहे। सांसद श्रीमती मंजू शर्मा, विधायक गोपाल शर्मा, राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक निनाद गोपाल सहित अन्य अतिथि कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
राज्यपाल ने पूर्वोत्तर भारत के हस्तशिल्प, लघु उद्योगों और वहां के विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध संस्कृति, कला, हस्तशिल्प और परंपराओं को देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित कलाकृतियों को भी देखा और कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की।
