SIR विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- ‘हमने मॉडिफाइड फॉर्म-6 को मंजूरी नहीं दी’
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को संशोधित Form-6 को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने Form-6 के किसी भी संशोधित प्रारूप को मंजूरी नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी स्तर पर नियमों के विपरीत या गैरकानूनी तरीके से बदलाव किया गया है, तो इसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी और संबंधित लोगों को उसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि आखिर Form-6 में बदलाव किसने किया।
‘मॉडिफाइड फॉर्म-6 को हमने अप्रूव नहीं किया’
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित Form-6 को मंजूरी नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद कोर्ट यह देखना चाहता है कि फॉर्म में बदलाव किसके स्तर पर किया गया। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब चुनाव आयोग की ओर से पहले यह कहा गया था कि SIR से संबंधित नए Form-6 घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के बिहार SIR फैसले के अनुरूप तैयार किया गया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार की सुनवाई में स्पष्ट कर दिया कि उसने इस संशोधित Form-6 को मंजूरी नहीं दी थी।
Form-6 में क्या बदलाव किया गया था?
Form-6 का इस्तेमाल नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। ऑनलाइन प्रक्रिया में जो नया बदलाव सामने आया, उसमें आवेदक से यह जानकारी मांगी गई कि उसका नाम या उसके माता-पिता का नाम पिछली SIR की मतदाता सूची में मौजूद था या नहीं। यदि आवेदक या उसके माता-पिता का नाम पिछली SIR सूची में मौजूद होने की जानकारी दी जाती है, तो संबंधित विधानसभा क्षेत्र, बूथ नंबर और मतदाता सूची में क्रमांक जैसी जानकारी भी मांगी जाती है।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह अतिरिक्त घोषणा-पत्र ऑनलाइन Form-6 प्रक्रिया में जोड़ा गया था, जबकि वैधानिक Form-6 में बदलाव के लिए निर्धारित नियमों के तहत संशोधन और अधिसूचना की आवश्यकता होती है।
दो चुनाव आयुक्तों ने भी उठाए थे सवाल
Form-6 में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठ चुके हैं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई 2026 में रिकॉर्ड पर कहा था कि Form-6 में बदलाव Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन किए बिना नहीं किया जा सकता। इसके बाद चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस बदलाव पर आपत्ति जताई और इसे अनधिकृत बताते हुए हटाने की बात कही थी। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस मामले में अपनी आपत्तियां रिकॉर्ड पर दर्ज की थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
यह मामला चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में चुनाव आयोग द्वारा लिए गए कई फैसलों को चुनौती दी गई है और आरोप लगाया गया है कि कुछ फैसले निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना लिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनसे यह स्पष्ट करने को कहा है कि विवादित फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए गए और क्या निर्णय सामूहिक रूप से या निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुसार लिए गए थे।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने जैसी अंतरिम राहत देने से इनकार किया है। मामले में आगे की सुनवाई जवाब दाखिल होने के बाद होगी।
SIR को लेकर क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
SIR के तहत मतदाता सूचियों की गहन जांच और पुनरीक्षण किया जा रहा है। ऐसे में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में अतिरिक्त जानकारी मांगने का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की सोमवार की टिप्पणी से यह साफ है कि अदालत इस बात की जांच करना चाहती है कि Form-6 में बदलाव किस अधिकार और किस प्रक्रिया के तहत किया गया। अब चुनाव आयोग के जवाब के बाद यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ऑनलाइन फॉर्म में बदलाव का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था।
मामले की अगली कार्रवाई चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब तथा रिकॉर्ड पर निर्भर करेगी।