निवेशकों के हित में रीको का बड़ा कदम, औद्योगिक भूखंडों के उपयोग की समय सीमा में दी राहत
जयपुर, 10 सितंबर 2026। राजस्थान में औद्योगिक विकास को गति देने और निवेशकों को राहत प्रदान करने की दिशा में राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (रीको) ने बड़ा कदम उठाया है। रीको ने औद्योगिक भूखंडों के आवंटन के बाद उन पर औद्योगिक इकाई स्थापित कर उत्पादन शुरू करने की निर्धारित समय-सीमा में राहत दी है। इस फैसले से उन निवेशकों और उद्यमियों को फायदा मिलेगा, जो आवश्यक स्वीकृतियां एवं आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण तय समय में अपनी इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं कर पा रहे थे।
रीको ने RIICO Disposal of Land Rules, 1979 के नियम 21 एवं नियम 4ए में आवश्यक संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी उद्यमी को भूखंड आवंटित होने के बाद आवश्यक स्वीकृतियां या आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाती हैं, तो औद्योगिक क्षेत्र के विकसित घोषित होने तक उसे निर्धारित समय-सीमा में राहत दी जा सकेगी। इसके बाद उद्यमी को भूखंड पर निर्माण कार्य पूरा कर औद्योगिक उत्पादन शुरू करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिलने पर भी राहत
वर्तमान में राजस्थान औद्योगिक विकास नीति-2025 के तहत भूखंड आवंटन के बाद इकाई में व्यावसायिक उत्पादन शुरू करने के लिए निर्धारित समय-सीमा का प्रावधान है। कई मामलों में उद्यमियों की ओर से आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी किए जाने के बावजूद पर्यावरणीय स्वीकृति सहित अन्य जरूरी अनुमतियां समय पर नहीं मिल पाती हैं। ऐसे मामलों में निर्माण पूरा होने और इकाई को उत्पादन के लिए तैयार करने के बावजूद व्यावसायिक गतिविधियां शुरू करने में देरी हो जाती है। रीको ने ऐसे निवेशकों की व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नियमों में संशोधन किया है। इससे उन परियोजनाओं को राहत मिलेगी, जिनमें उद्यमियों की ओर से देरी जानबूझकर नहीं की गई है, बल्कि आवश्यक स्वीकृतियां या आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण परियोजना समय पर शुरू नहीं हो सकी।
उद्यमियों की मांग पर लिया गया फैसला
रीको के इस निर्णय के पीछे उद्यमियों की ओर से लगातार उठाई जा रही मांग भी महत्वपूर्ण रही है। उद्यमियों का कहना था कि औद्योगिक क्षेत्रों में आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के उपलब्ध होने और विभिन्न स्वीकृतियां प्राप्त होने में लगने वाले समय को देखते हुए निर्धारित समय-सीमा में व्यावसायिक उत्पादन शुरू करना कई बार व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। उद्योग जगत ने सुझाव दिया था कि औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जाने के बाद ही इकाइयों को उत्पादन शुरू करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए रीको ने संबंधित प्रावधानों में बदलाव किया है।
संशोधित प्रावधानों से मिलेगी अतिरिक्त समय-सीमा
संशोधित प्रावधानों के अनुसार, जिन परियोजनाओं के लिए आवश्यक स्वीकृतियां समय पर उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें भूखंड आवंटन की निर्धारित अवधि में राहत दी जाएगी। स्वीकृति प्राप्त होने के बाद संबंधित उद्यमी को निर्धारित अवधि के भीतर निर्माण एवं अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी कर व्यावसायिक उत्पादन शुरू करना होगा। इसी प्रकार, जिन परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक है, उन्हें भूखंड आवंटन की तिथि से तीन वर्ष की अवधि अथवा पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त होने की तिथि से एक वर्ष की अवधि के भीतर व्यावसायिक उत्पादन शुरू करना होगा। यह प्रावधान भूखंड आवंटन की शर्तों का हिस्सा रहेगा।
पहले लग चुकी पेनल्टी में भी राहत का प्रावधान
पूर्व में आवंटित औद्योगिक भूखंडों पर यदि मध्यवर्ती अनुमतियां प्राप्त नहीं होने के कारण निर्धारित समय-सीमा पूरी नहीं हो सकी और निवेशकों पर पेनल्टी लगाई जा चुकी है, तो संशोधित प्रावधानों के तहत उस पेनल्टी को समायोजित करने का रास्ता भी साफ किया गया है। इससे पहले से निवेश कर चुके उद्यमियों को भी राहत मिलने की संभावना है।
औद्योगिक निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
रीको का यह निर्णय राज्य में औद्योगिक भूखंडों के बेहतर उपयोग और वाणिज्यिक उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य औद्योगिक परियोजनाओं के लिए नियमों को अधिक व्यावहारिक और परिस्थितियों के अनुरूप बनाना है। सरकार का मानना है कि औद्योगिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक देरी कम होने से राज्य में नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन शुरू होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। संशोधित नियमों से निवेशकों को आवश्यक स्वीकृतियां और आधारभूत सुविधाएं प्राप्त करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा तथा औद्योगिक भूखंडों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
