रामदेवरा में गोडावण री-वाइल्डिंग एवियरी का उद्घाटन, CM भजनलाल बोले- संरक्षण को मिलेगी नई उड़ान

जयपुर, 3 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि गोडावण राजस्थान की प्राकृतिक धरोहर और प्रदेश की जैव विविधता का महत्वपूर्ण प्रतीक है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से गोडावण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि गोडावण के लिए प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप भव्य पक्षीगृह के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने 9.25 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है।

मुख्यमंत्री शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रामदेवरा में नवनिर्मित गोडावण री-वाइल्डिंग एवियरी (पुनर्स्थापन पक्षीगृह) के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह संरचना भारत में अपनी तरह की अनूठी पहल है। इसमें कैप्टिव-ब्रेड गोडावण को खुले प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करने से पहले प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने का अवसर मिलेगा।

गोडावण संरक्षण को मिलेगी नई उड़ान

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोडावण के संरक्षण की यह पहल राजस्थान के लिए गौरव का विषय है और इससे प्रदेश में गोडावण संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार गोडावण के साथ-साथ राजस्थान की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए भी लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘हरियालो राजस्थान’ अभियान के तहत प्रदेश में अब तक 29 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। वन एवं वन्यजीव संरक्षण में सहयोग के लिए 38,622 वन मित्रों का पंजीयन किया गया है। इसके अलावा अजमेर के सौंखनिया क्षेत्र में खरमोर पक्षी के संरक्षण के लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के साथ एमओयू किया गया है। उदयपुर शहर को रामसर वेटलैंड सिटी घोषित किया गया है।

जल संरक्षण को लेकर भी सरकार के प्रयास

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हुए 10 अंतरराज्यीय जल समझौतों में से चार राजस्थान से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि जिन कार्यों को कभी असंभव माना जाता था, उन्हें प्रधानमंत्री के नेतृत्व में धरातल पर साकार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान की पहचान केवल ‘हरियालो राजस्थान’ के रूप में ही नहीं, बल्कि पानी से भरपूर प्रदेश के रूप में भी होगी।

प्रकृति की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति में माना गया है कि यदि हम प्रकृति की रक्षा करेंगे तो प्रकृति भी हमारी रक्षा करेगी। गोडावण का संरक्षण केवल एक पक्षी की प्रजाति को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण थार के पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे गोडावण को मरुधरा के खुले आसमान में सुरक्षित और स्वच्छंद उड़ान भरते देखने के मिशन में अपना योगदान देने का संकल्प लें।

भूपेंद्र यादव बोले- गोडावण संरक्षण वैश्विक उदाहरण

केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पूरा थार क्षेत्र गोडावण से भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में गोडावण संरक्षण के क्षेत्र में हासिल प्रगति आज वैश्विक स्तर पर एक उदाहरण बन चुकी है। उन्होंने कहा कि गोडावण संरक्षण कार्यक्रम की सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच के साथ केंद्र और राज्य सरकारों, वैज्ञानिकों, वन विभाग तथा स्थानीय समुदायों के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

भूपेंद्र यादव ने कहा कि गोडावण थार पारिस्थितिकी तंत्र की अम्ब्रेला स्पीशीज है। इसके संरक्षण से घासभूमियों की रक्षा, भूमि क्षरण को रोकने और मध्य एशियाई फ्लाईवे में प्रवासी पक्षियों के महत्वपूर्ण पड़ावों के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि गोडावण संरक्षण से पर्यावरणीय लाभ के साथ स्थानीय समुदायों को इको-टूरिज्म के माध्यम से आर्थिक लाभ भी मिल सकता है।

रामदेवरा और सम में 97 गोडावण

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार, राजस्थान सरकार और भारतीय वन्यजीव संस्थान के संयुक्त प्रयासों से जैसलमेर के सम और रामदेवरा प्रजनन केंद्रों में 97 गोडावण मौजूद हैं। रामदेवरा में विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के परामर्श से तैयार की गई री-वाइल्डिंग एवियरी कैप्टिव-ब्रेड गोडावण को पर्याप्त उड़ान क्षेत्र उपलब्ध कराती है। इससे पक्षियों को प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप ढलने और स्वाभाविक व्यवहार विकसित करने में मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस पहल के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का आभार जताते हुए कहा कि यह उपलब्धि केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ वैज्ञानिकों, वन विभाग और स्थानीय समुदायों के संयुक्त प्रयासों से संभव हुई है। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ जोधपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संजय शर्मा तथा वन विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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