RBI रेपो रेट में 3 बार और करेगा बढ़ोतरी? गोल्डमैन सैक्स की बड़ी भविष्यवाणी, जानें लोन की EMI पर असर
बिजनेस न्यूज | 10 अक्टूबर 2026
देश में महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति पर सबकी नजरें टिकी हैं। गोल्डमैन सैक्स के मुख्य भारत अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता ने अनुमान जताया है कि RBI जून 2027 तक ब्याज दरों में तीन बार और बढ़ोतरी कर सकता है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर लगभग 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।
जून 2027 तक 75 बेसिस पॉइंट बढ़ोतरी का अनुमान
गोल्डमैन सैक्स के अनुमान के अनुसार, RBI आने वाले महीनों में कुल 75 बेसिस पॉइंट यानी 0.75 प्रतिशत तक ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इस संभावित बढ़ोतरी का उद्देश्य महंगाई के दबाव को नियंत्रित करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्याज दरों में अगली बढ़ोतरी दिसंबर 2026 में हो सकती है। इसके बाद फरवरी 2027 और फिर अप्रैल या जून 2027 में एक और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। हालांकि, इन तारीखों पर RBI की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
रेपो रेट बढ़ने से आम लोगों पर क्या असर होगा?
रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक धन उपलब्ध कराता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों की उधारी लागत बढ़ सकती है, जिसका असर ग्राहकों को मिलने वाले लोन की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। अगर बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे मौजूदा कर्जदारों की EMI बढ़ने या लोन की अवधि लंबी होने की संभावना रहती है।
हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक ब्याज दरों में कितना बदलाव करते हैं और ग्राहक का लोन किस प्रकार की ब्याज दर से जुड़ा है। फिक्स्ड रेट वाले कर्ज पर तत्काल असर जरूरी नहीं है।
कच्चे तेल की कीमतें बनीं चिंता का कारण
गोल्डमैन सैक्स ने कच्चे तेल की कीमतों को भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है।
इसका असर परिवहन, उत्पादन और अन्य वस्तुओं की लागत पर पड़ सकता है। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो महंगाई और बढ़ सकती है। यही वजह है कि तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी रहने पर RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है।
7 प्रतिशत रह सकती है आर्थिक विकास दर
ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद गोल्डमैन सैक्स को उम्मीद है कि भारत की आर्थिक विकास दर लगभग 7 प्रतिशत रह सकती है। हालांकि, अर्थशास्त्री ने अल नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है। अल नीनो की स्थिति में मानसून और वर्षा के पैटर्न पर असर पड़ सकता है। इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने और खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है। यदि कृषि उत्पादन कमजोर रहता है, तो ग्रामीण मांग और आर्थिक विकास पर भी दबाव पड़ सकता है
निवेशकों और कर्जदारों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
RBI की ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी का असर बैंकिंग, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और अन्य ब्याज-संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ सकता है। वहीं, बैंक जमा पर मिलने वाली ब्याज दरों में भी बदलाव संभव है, लेकिन यह प्रत्येक बैंक की नीतियों पर निर्भर करेगा।
फिलहाल, गोल्डमैन सैक्स का अनुमान भविष्य की संभावित मौद्रिक नीति को लेकर है। RBI का वास्तविक फैसला महंगाई, आर्थिक विकास, कच्चे तेल की कीमतों और अन्य आर्थिक आंकड़ों के आधार पर होगा। इसलिए होम लोन लेने वाले ग्राहकों और निवेशकों को किसी भी अनुमान को अंतिम निर्णय मानने के बजाय अपनी वित्तीय योजना में संभावित बदलावों के लिए तैयार रहना चाहिए।