राजस्थान में फैटी लिवर की स्क्रीनिंग में देश में प्रथम स्थान पर प्रदेश
जयपुर। राजस्थान में फैटी लिवर की बीमारी की समय पर पहचान और उपचार के लिए बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश के सभी 63 जिला अस्पतालों में मिशन लिवर के तहत क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। अब तक करीब 2.61 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें 31.02 लाख लोग संदिग्ध पाए गए हैं।
प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य गायत्री राठौड़ ने बताया कि राजस्थान में फैटी लिवर की स्क्रीनिंग का व्यापक स्तर पर विस्तार किया जा रहा है। मिशन लिवर के माध्यम से फैटी लिवर की समय पर पहचान, आवश्यक जांच और उपचार के लिए रेफरल व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शनिवार को इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. शिव सरीन की अध्यक्षता में मिशन फैटी लिवर से संबंधित बैठक स्वास्थ्य भवन में आयोजित हुई। बैठक में स्क्रीनिंग, उपचार, प्रशिक्षण और आगे की कार्ययोजना को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
स्कूलों में बच्चों के वजन और ऊंचाई की होगी जांच
मिशन के तहत स्कूलों में बच्चों के स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रदेश के सभी स्कूलों में डब्ल्यूएचओ जोन बनाए जाएंगे। यहां विद्यार्थियों के वजन, ऊंचाई और कमर की नाप की जाएगी। इस गतिविधि को आरबीएसके एवं आरकेएसके कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से बच्चों में मोटापे और मेटाबोलिक जोखिम की समय पर पहचान करने में मदद मिलेगी।
लिवर डिजीज रजिस्ट्री और बायो बैंक की संभावना
बैठक में मरीजों की जानकारी और उपचार की स्थिति को बेहतर तरीके से ट्रैक करने के लिए लिवर डिजीज रजिस्ट्री तैयार करने की संभावना पर भी चर्चा की गई। ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से लिवर डिजीज रजिस्ट्री तैयार करने से मरीजों की जानकारी और उपचार की स्थिति को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा। इसके साथ ही प्रदेश में बायो बैंक की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।
मोटापा कम करने के लिए मिशन ओबेसिटी लॉन्च
फैटी लिवर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल मोटापे को कम करने के लिए मिशन ओबेसिटी शुरू किया जाएगा। इसके तहत इंटरनेशनल कैंपेन के माध्यम से स्वास्थ्य, खान-पान और बेहतर जीवनशैली को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
63 जिला अस्पतालों में लिवर स्माइल क्लीनिक
प्रदेश के सभी 63 जिला अस्पतालों में लिवर स्माइल क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं। इन क्लीनिकों में फैटी लिवर की जांच, आवश्यक सलाह और जरूरत के अनुसार आगे के उपचार के लिए रेफरल की व्यवस्था की गई है। क्लीनिक प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को संचालित किए जा रहे हैं।
करीब 10 हजार स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण
मिशन के तहत 150 नोडल अधिकारियों एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा करीब 10 हजार मेडिकल ऑफिसर्स एवं कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आगे भी अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को फैटी लिवर की स्क्रीनिंग के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
2.61 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग
प्रमुख शासन सचिव ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 2.61 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 31.02 लाख लोग संदिग्ध पाए गए। वहीं वर्ष 2026-27 में अब तक 1.32 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है और इनमें 17.44 लाख लोग संदिग्ध पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में पीएचसी एवं सीएचसी स्तर पर अब तक 26,54,556 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है, जिनमें 2,38,910 लोग संदिग्ध पाए गए। जिला अस्पताल स्तर पर भी 13,021 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।
संदिग्ध मरीज इलाज तक क्यों नहीं पहुंच रहे, होगा अध्ययन
स्क्रीनिंग के दौरान संदिग्ध पाए जाने वाले मरीजों में से जो मरीज आगे इलाज के लिए नहीं पहुंच रहे हैं, उनके कारणों का अध्ययन कराया जाएगा। अध्ययन के आधार पर मरीजों की जांच, सलाह और उपचार से जोड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जांच से उपचार तक रेफरल की व्यवस्था
स्वास्थ्य केंद्रों पर प्राथमिक जांच के बाद जरूरत के अनुसार मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जाएगा। जिला अस्पताल में फाइब-4 स्कोर के माध्यम से बीमारी की गंभीरता का आकलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज में फाइब्रोस्कैन, बायोप्सी और लिवर ट्रांसप्लांट के लिए रेफरल की व्यवस्था भी उपलब्ध रहेगी।
संतुलित खान-पान और नियमित गतिविधि पर जोर
गायत्री राठौड़ ने कहा कि फैटी लिवर से बचाव के लिए संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है। मिशन का उद्देश्य बीमारी की समय पर पहचान के साथ लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है। बैठक में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त बादूलाल गोयल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी आरपीएचएसआरसी हरीशजीत अटल, खाद्य आयुक्त अविचल चतुर्वेदी, निदेशक जन स्वास्थ्य डॉ. प्रशांत कुमार सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
