महंगाई की चिंता में शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 73,000 और निफ्टी 22,700 के नीचे बंद
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को गिरावट दर्ज की गई। महंगाई बढ़ने की चिंता, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और निवेशकों की मुनाफावसूली के कारण घरेलू शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 73,000 अंक और एनएसई निफ्टी 22,700 अंक के अहम स्तर से नीचे रहा। पिछले कारोबारी सत्र में जोरदार तेजी के बाद बाजार में बिकवाली देखने को मिली।
कारोबार समाप्त होने पर 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 251.89 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 72,781.89 अंक पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 99.25 अंक यानी 0.44 प्रतिशत टूटकर 22,622.70 अंक पर आ गया। दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 73,195.26 अंक का ऊपरी स्तर और 72,578.75 अंक का निचला स्तर छुआ। <Cite refs={[“turn832561search1″,”turn832561search0”]}/>
महंगाई ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह थोक महंगाई दर में बढ़ोतरी रही। सितंबर में भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 11.39 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 9.92 प्रतिशत थी। खाद्य पदार्थों, विनिर्मित उत्पादों और ईंधन एवं बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ाईं।
महंगाई में लगातार तेजी रहने से भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति पर भी असर पड़ सकता है। निवेशकों को आशंका है कि कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की जरूरत पड़ सकती है। ऊंची ब्याज दरों से कंपनियों की उधारी लागत बढ़ सकती है और कारोबार के विस्तार पर असर पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों से बाजार पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 106.10 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रही।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतें ऊंची रहने से देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे महंगाई, रुपये की विनिमय दर और कंपनियों की उत्पादन लागत प्रभावित होने की आशंका रहती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर परिवहन, विमानन, पेंट, रसायन और अन्य तेल आधारित उद्योगों पर पड़ सकता है। <Cite refs={[“turn832561search1″,”turn832561search9”]}/>
इन शेयरों में रही खरीदारी और बिकवाली
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फिनसर्व, इटरनल, आईसीआईसीआई बैंक और इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इन शेयरों पर बिकवाली का दबाव बाजार की कमजोरी की प्रमुख वजहों में शामिल रहा।
दूसरी ओर, आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इंफोसिस, टेक महिंद्रा और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी तेजी दर्ज की गई। आईटी शेयरों की खरीदारी ने बाजार की गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद की। <Cite refs={[“turn832561search1″,”turn832561search9”]}/>
विदेशी निवेशकों की बिकवाली पर नजर
विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को भारतीय शेयरों में 1,305.13 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा देने में मददगार रही।
इससे पहले मंगलवार को सेंसेक्स 1,109.10 अंक और निफ्टी 358.60 अंक की जोरदार बढ़त के साथ बंद हुए थे। इसके बाद बुधवार को निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बाजार की तेजी पर विराम लग गया। <Cite refs={[“turn832561search1″,”turn832561search9”]}/>
आगे बाजार की चाल किन बातों पर निर्भर करेगी?
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, रुपये की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। वैश्विक बाजारों के संकेत भी घरेलू शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
कुल मिलाकर, महंगाई का दबाव और ऊंची तेल कीमतें फिलहाल बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच सोच-समझकर फैसले लें और निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों तथा जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करें।